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दिलवालों का शहर दिल्ली की यात्रा

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भारत की राजधानी दिल्ली  के टूरिस्ट प्लेस अपने आप में एक नए रंग को समेटे हुए है। यहां के दर्शनीय जगह किसी ना किसी इतिहास से जुड़े हुए है। अगर वर्तमान की बात करें तो दिल्ली की राजनीतिक खबरों से होने वाली उथलपुथल , दिल्ली में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड, यहां मिलने वाले पकवान सभी प्रसिद्ध हैं। यदि आप इस शहर की यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं तो जरूर अपने घूमने वाले लिस्ट में इन जगहों को शामिल करें।

कुतुबमीनार

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दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध चीजों में एक स्मारक कुतुबमीनार है। यह दुनियां का सबसे ऊंचा टावर है। इसे यूनेस्को के द्वारा विश्व विरासत स्थल माना गया है। इसका निर्माण कुतुब उद-दीन-ऐबक  ने करवाया था। इसके बाद कई मुगल शासकों ने इसका निर्माण पूरा करवाया। यह स्मारक भारतीय इस्लामिक वास्तुकला को बखूबी प्रदर्शित करता है। कुतुबमीनार दक्षिण दिल्ली के महरौली भाग में स्थित है। यह स्मारक लाल पत्थर और मार्बल से मिलकर बना हुआ है।

 

लोटस टेम्पल

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जैसे की नाम से ही पता पड़ता है यह मंदिर की आकृति कमल फूल के समान है। यह मन्दिर बहाई विश्वास को समर्पित है। यहां सभी धर्म के लोग आकर ध्यान लगा सकते हैं। यहाँ आप कुछ पल ही बैठेंगे तो असीम शांति का अनुभव करेंगे। यदि आप यहां पहुँचना चाहते हैं तो कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन सबसे बढ़िया विकल्प है क्योंकि यहां से मंदिर का प्रवेश द्वार मात्र 10 मिनट की दूरी पर है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मंदिर सोमवार को बंद रहता है।

 

इस्कान मन्दिर

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लोटस टेम्पल से महज 10 मिनट की दूरी पर यह भव्य राधा कृष्ण का मंदिर अपने आप में अनुपम है। इसे राधा पार्थसारथी  मंदिर नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1998 में हुआ था। यह मंदिर का परिसर देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। यहां क्या देशी क्या विदेशी भक्त राधा कृष्ण की भक्ति में रमे नजर आते हैं। यहां आपको कई अनुपम पेंटिंग्स देखने को मिल जाएंगी जो कि विदेशी भक्तो के द्वारा बनाई गई है। यह मंदिर सवेरे 4 बजे से खुल जाता है। दिल्ली की यात्रा में इसे देखना ना भूले।

 

कनॉट प्लेस

cnaough place

इसकी सरंचना देश विदेश से आये पर्यटकों को लुभाती है। व्यापारिक दृष्टि से भी इस स्थान का विशेष महत्व है। एक समय यहाँ भारत का सबसे बड़ा बाजार हुआ करता था। आज भी यहां अच्छा खासा मार्केट है। यहाँ अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड के कपड़ों के शोरूम, रेस्त्रां और बार सभी हैं। अगर आप शॉपिंग करना चाहते हैं तो इससे बढ़िया जगह और नही है। कपड़ो के लिए यह स्थान बहुत फेमस है। यदि आप मोलभाव कर सकते हैं तो इससे बेहतर जगह और नही है। यहां आप धूप घड़ी , ज्यामितिक इमारतें सब देख सकते हैं। यहां का हनुमान मंदिर , बंगला साहेब गुरुद्वाराकी सुंदरता देखते ही बनती है। दिल्ली के शोरगुल से दूर यहां आप सुकून का अनुभव करेंगे।

जामा मस्जिद

zama masjid

जामा मस्जिद दिल्ली की सबसे बडी मस्जिद है जिसकी भव्यता देखते ही बनती है। इसकी वास्तुकला बरबस आपका ध्यान अपनी ओर खींच लेगी। यहां 25000 से ज्यादा लोग एक साथ बैठ कर नमाज अदा कर सकते हैं।इस मस्जिद को मस्जिद – ए – जहानुमा  भी कहा जाता है। इस मस्जिद को बादशाह शाहजहां ने बनवाया था।

लाल किला

Red Fort

दिल्ली के लाल किले को देखे बिना,दिल्ली की यात्रा अधूरी मानी जायेगी। यह हमारे भारत की शान है। लाल बलुआ पत्थरों से इसका निर्माण हुआ है, इसलिए ही इसे लाल किला कहा जाता है। इस किले के अंदर दीवाने आम, दीवाने खास, हीरा महल प्रसिद्ध इमारते हैं। लाल किले का हर पत्थर हमारे इतिहास को बयान करता है। हर साल 15 अगस्त को हमारे प्रधानमंत्री जी यही झंडा लहरा कर पूरी दुनिया को संदेश देते हैं। यदि आप इसे अच्छे से देखना चाहतें हैं तो बेहतर होगा आप एक गाइड कर लें । यहां हर शाम होने वाले लाइट और साउंड शो को देखना नही भूले। इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर माना गया है। लाल किला पर्यटकों के लिए सोमवार को बंद रहता है , इसलिए इस बात का ध्यान रखते हुए अपना प्लान बनाये।

इंडिया गेट

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इंडिया गेट दिल्ली के मुख्य आकर्षण में से एक है। अखिल भारतीय युद्ध स्मारक जिसे इंडिया गेट कहा जाता है, की संरचना बहुत ही भव्य है। इसकी तुलना फ्रांस में आर्क डी ट्रायम्फ से की जाती है। यह 42 मीटर लंबा स्मारक है। इंडिया गेट देश के सबसे बड़े युद्ध स्मारक में से एक है। कहा जाता है इंडिया गेट की नींव 10 फरवरी 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी और इसके निर्माण में 10 वर्ष से भी ज्यादा समय लगा। इंडिया गेट का डिजाइन सर एडविन लुटियन  ने बनाया था। इंडिया गेट आकर राजपथ पर आप सैर कर सकते हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए लगभग 80000 से भी अधिक सैनिकों के नाम इंडिया गेट में उकेरा गया है। यदि आप इतिहास में रुचि रखते हैं तो इंडिया गेट जरूर जाएं।

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संसद भवन

भारत की राजधानी दिल्ली का संसद भवन भी देखते ही बनता है। 88 साल पुरानी संसद की इमारत वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है। इसका निर्माण 12 फरवरी 1921 को ड्यूक ऑफ कनाट ने करवाया था। जिनके नाम भी दिल्ली का कनॉट प्लेस का नाम रखा गया है। संसद भवन के खंभे और गोलाकर बरामदे पुर्तगाली वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। दिल्ली की यात्रा में इसे देखना ना भूले। हालांकि यह आम पर्यटकों के लिए खुला नही रहता है।

इसके अलावा आप दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, लोधी गार्डन, लक्ष्मी नारायण मंदिर, अक्षरधाम मंदिर, जंतर मंतर, नेशनल म्यूजियम, गुरुद्वारा बंगला साहिब, राज घाट, चांदनी चौक देखना ना भूले।

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