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चंपानेरः गुजरात का पहला यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज साईट

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आज चले एक ऐसी नगरी की यात्रा में जिसका इतिहास 2000 साल पुराना है। गुजरात का चंपानेर एक ऐतिहासिक, जीवित सांस्कृतिक धरोहर का निशान है। गुजरात प्रदेश के पावागढ़ हिल्स के बीच में बसा हुआ यह ऐतिहासिक नगर चंपानेर यूनेस्को विश्व धरोहर के खिताब से नवाजा जा चुका है। चंपानेर गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है यह पुरातात्विक महत्व के लिए मशहूर है। यहां कई जैन मंदिर, हिंदू मंदिर और मस्जिद है। यहां की अनोखी ऐतिहासिक संरचनाओं के साथ-साथ यहां पानी के जलाशय भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

चंपानेर की ऐतिहासिक संरचनाओं को देखकर आपको इस बात का एहसास होगा कि 2000 साल पहले भी लोग वास्तु कला और शिल्प कला तकनीक में कितने दक्ष थे। यहां इतनी पुरानी सांस्कृतिक धरोहर में अर्बन प्लैनिंग का बेजोड़ नमूना देखने को मिलता है। गुजरात की वडोदरा से 45 किलोमीटर उत्तर पूर्व में और गोधरा से 42 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में पावागढ़ पहाड़ियों पर चंपानेर फैला हुआ है।

चंपानेर-पावागढ़ आर्कियोलॉजिकल पार्कः

यह पुरातात्विक खुदाई से मिला प्राचीन कालीन नगर है। ऐसा लगता है कि पुरातात्विक खुदाई के बाद पूरा एक नगर उभर कर सामने आ गया है। इस प्राचीन नगर में सड़क, पार्क, शॉपिंग कंपलेक्स, घर और वो सब कुछ है जो आज के समाज में पाया जाता है। सरकार की तरफ से इस स्थल का रखरखाव भी बहुत अच्छे से किया गया है।

जामी मस्जिदः

ये चंपानेर की सबसे खूबसूरत संरचना है। जामी मस्जिद  भारतीय इस्लामिक स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इस प्राचीन मस्जिद में 172 खंभे हैं हैं जो की मुख्य गुंबद का आधार है। माना जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण 15 वीं शताब्दी में किया गया था। इस मस्जिद की सबसे खास बात है यहां मेहराब, गुंबद और मीनारे इस्लामिक वास्तुकला से मिलते हैं। वहीं इसके झरोखे में गुजराती वास्तुकला देखने को मिलती है।

लाकुया माता का मंदिरः

चंपानेर-पावागढ़ आर्कियोलॉजिकल पार्क में सबसे प्राचीन लाकुया माता का मंदिर है। माना जाता है इसे 10वीं और 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह मौलिया पठार पर स्थित है। यह मंदिर लाकुसिया को समर्पित है जो भगवान शिव की भक्त थी।

जैन मंदिरः

पावागढ़ हिल्स पर जैन मंदिर भी बने हुए है। माना जाता है इन मंदिरों का निर्माण 13 वीं और 14 वीं सेंचुरी में किया गया था। यह मंदिर जैन धर्म में चंद्रप्रभा, पार्श्वनाथ, सपश्रव्नाथ, को समर्पित है। इतिहासकारों का मानना है कि किसी समय गुजरात में जैन धर्म का बहुत बड़ा प्रभाव था| तब लोगों के बीच इन मंदिरों की बड़ी मान्यता थी। यहां सबसे प्राचीन स्टेप वॉल मिलता है जिसका निर्माण गुजरात के सुल्तान ने 1498 में करवाया था। इस स्टेप वॉल की सबसे बड़ी खासियत है कि मुस्लिम बादशाह के द्वारा निर्मित होने पर भी इसमें गणेश और देवी शारदा की स्तुति लिखवाई गई है।

kanjiranga national park

जंबूघोड़ा वाईल्ड लाइफ सेंचुरीः

जंबूघोड़ा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी चंपानेर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां प्राकृतिक प्रेमियों को बहुत खूबसूरत स्थान देखने को मिलता है। यहां टीक, बांस, और महुआ के पेड़ों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती है। ये एक घना जंगल है। इस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की सबसे खास बात है कि यहां पक्षियों की भी कमी नहीं है। यहां अनेक प्रजाति के कई पक्षी देखने को मिलते हैं। बल्कि कई अप्रवासी पक्षियों का बसेरा भी यह वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है।

कब जाएः

यहां जाने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे सही होता है। मानसून में ये जगह हरियाली से भर जाता है। यहां बरसाती झरने भी देखने को मिलते हैं।

कैसे पहुंचेः

चंपानेर के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ‘चंपानेर रोड रेलवे स्टेशन’ है जो पंचमहल जिले में स्थित है।

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