Home Top City मनियारी नदी के तट पर छत्तीसगढ़ का पुरातात्विक स्थलः तालागांव

मनियारी नदी के तट पर छत्तीसगढ़ का पुरातात्विक स्थलः तालागांव

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ताला गांव की यात्रा प्राचीन काल में वापस जाने जैसा है। यहां पहुंचकर प्राचीन छत्तीसगढ़ या कहे दक्षिण कौशल की संस्कृति को समझा जा सकता है। तालागांव अपनी कलाकृतियां और प्राचीन दुर्लभ मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। तालागांव, मनियारी नदी के तट पर स्थित है। तालागांव अपने प्राचीन मंदिर देवरानी-जेठानी मंदिर के लिए खासतौर पर जाना जाता है। इसकी खोज 1873 में की गई थी। इतिहासकारों के अनुसार ये लगभग 7 वीं सदी में बने थे।

देवरानी जेठानी मंदिरः

देवरानी-जेठानी दो अलग-अलग मंदिर है। यह दोनों मंदिर मनियारी नदी के तट पर ताला नामक गांव पर स्थित है। ये दोनो मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इतिहासकारों के अनुसार इसे दक्षिण कौशल के सर्वपूरी राजाओं ने बनवाया था।

जेठानी मंदिर, दक्षिणा मुखी भगवान शिव को समर्पित है। ये मंदिर वैसे तो अब बहुत क्षतिग्रस्त हो चुके हैं फिर भी यहां प्राचीन कलाकृतियों की अद्भुत झलक देखने को मिलती है।
जेठानी मंदिर की सीढ़ियां चंद्रशिलायुक्त देहरी कला के द्वारा बनाई गई हैं।  यहां पर एक विशाल हाथी की मूर्ति है जिसमें गज लक्ष्मी का चित्रण किया गया है। यह मंदिर पूरी तरह से हिंदू धर्म को समर्पित है यहां विभिन्न देवी-देवताओं, पशु, पौराणिक कथाएं, आकृति का पत्थरों पर पर चित्रण किया गया है।

देवरानी मंदिर, इस मंदिर में जो भगवान शिव की मूर्ति है जो बहुत अद्भुत है। ये मूर्ति पूर्व मूखी है। इस प्राचीन देवरानी मंदिर के पीछे मनिहारी नदी बहती है, जो छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिवनाथ नदी की सहायक नदी है। इस मंदिर का गर्भगृह काफी बड़ा और अद्भुत है। यहां की शिव प्रतिमा पशुपतिनाथ से संबंधित लगती है। जिसे एक कमरे के अंदर बंद कर दिया गया है बाहर से ही पर्यटक इसे देख सकते हैं या इसकी पूजा कर सकते हैं। इस दुर्लभ मूर्ति को छूने की अनुमति नहीं है।


दुर्लभ रूद्र-शिव प्राचीन प्रतिमाः

यह दुर्लभ शिव की प्रतिमा देवरानी मंदिर में स्थापित है। 1987 में पुरातात्विक खुदाई के दौरान देवरानी मंदिर में ये अनोखी प्रतिमा खोजी गई थी। शैव संप्रदाय के लोगों के लिए यह मूर्ति बहुत खास है। ये शिव की अनोखी और अनूठी मूर्ति है, इसे रूद्र शिव के नाम से भी जाना जाता है। इसमें भगवान शिव की पूरी आकृति को विभिन्न प्रकार के जानवरों के द्वारा बनाया गया है। जैसे मुकुट का हिस्सा सांप के द्वारा बनाया गया है। वहीं पर नाक  गिरगिट के रूप में बनाया गया है। इसके कान मोर की तरह दिखाई देते हैं। मुंह केकड़े से निर्मित है। इसे पशुपतिनाथ से भी जोड़कर देखा जाता है। ये मूर्ति बहुत खास है।

क्यों जाएः

शिवनाथ की सहायक नदी मनियारी की खूबसूरती, बहता जल, बगल में प्राचीन इमारत, वहां की अद्भुत कलाकृति और सबसे दुर्लभ रूद्र शिव की प्रतिमा देखने के लिए तालागांव जरूर जाएं।

कैसे पहुंचेः

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से टैक्सी और बस के द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है। अगर आप ट्रेन के जरिए बिलासपुर आते हैं तो बिलासपुर मुख्य रेलवे स्टेशन से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप बाय एयर आना चाहते हैं तो रायपुर सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। जहां से हर बड़े हवाई अड्डे से उड़ानें भरी जाती है।

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